Sunday, 20 March 2016

जानिए मिनरल वॉटर की हक़ीकत – अवशय पढ़ें व सभी को बताए

भारत में एक आम बात हो गई है कि हर आदमी नल के पानी को छोड़कर बोतल का पानी पीना चाहता है क्योंकि दावा किया जाता है कि वह ‘मिनरल वॉटर’ होता है और ‘शुद्ध’ भी होता है| बात कुछ ठीक भी लगती है क्योंकि पानी की बोतल ख़रीदने वाले हर व्यक्ति के मन में कहीं ये विश्वास ज़रूर होता है कि वह ऐसा पानी पी रहा है जो उसकी सेहत के लिए बहुत लाभदायक है| या यूँ भी कहें कि पानी की बोतलें बनाने वाली कंपनियों ने एक सुनियोजित प्रचार के ज़रिए लोगों के दिलों में ये बात बिठा दी है कि पैसे से ख़रीदकर पिया गया पानी ही सेहत के लिए ठीक है और आम नल का पानी सेहत के लिए बहुत ख़तरनाक़ है|
लेकिन क्या हो जब आपको ये पता चले कि जो पानी की बोतल आप दूध के भाव ख़रीदते हैं उस बोतल में शुद्ध जल के बजाय ऐसा पानी होता है जो सेहत के लिए किसी ज़हर से कम नहीं| आपका भरोसा हिल सकता है और यह स्वभाविक भी है क्योंकि उसकी ठोस वजह है| वजह ये है कि आमतौर पर हर दुकान, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर बिकने वाली पानी की बोतलों की जाँच में पाया गया है कि उनमें ख़तरनाक़ हद तक कीटनाशक रसायन तक मिले होती हैं| भला हो भी क्यों नहीं, आखिर एक पानी की बोतल की एक्स्पायरी डेट 6 महीने तक होती है, अब आप ही बताइये कि गंगाजल को छोड़ कर दुनिया का ऐसा कौनसा पानी है जो 6 महीने बिना कीड़े पड़े बच सकता है|
भारत के माने हुए विज्ञान और पर्यावरण केंद्र यानि सीएसई ने अनेक ब्राँडों वाली पानी की बोतलों की जाँच की| केंद्र की निदेशक सुनीता नारायण बताती हैं कि सहयोगियों में ही यह विचार सामने आया कि बाज़ार में बिकने वाली खाने की चीज़ों और पानी की बोतलों की क्यों न जाँच की जाए कि इनका स्तर क्या होता है|इसके बाद दिल्ली और मुंबई के बाज़ार में बिक रहे बोतलबंद पानी के कई नमूने जमा किए गए| ये नमूने न केवल बाज़ार से बल्कि उन फ़ैक्टरियों से भी लिए गए जहाँ पानी की बोतलें भरी जाती हैं|
पानी की इन बोतलों की जाँच प्रयोगशाला में अमरीकी तकनीक और अत्याधुनिक पद्धति और उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए की गई| विज्ञान और पर्यावरण केंद्र के एक अन्य वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर एच बी माथुर बताते हैं कि नमूनों की कई बार और प्रामाणिक तरीक़े से जाँच की गई| निदेशक सुनीता नारायण कहती हैं, “जाँच के बाद जो जानकारी सामने आई वो बहुत ही भयानक है|”
34 नमूनों की जाँच में लगभग सभी बोतलों में मुख्य रूप से लिंडेन, डीडीटी, डीडीई, एंडोसल्फान, मेलाथियान और क्लोर पायरीफ़ोस नामक कीटनाशक सामान्य से 400 गुना अधिक मात्रा तक पाये गए| पूरी दुनिया के डॉक्टर एवं वैज्ञानिक जानते है कि डीडीटी, लिंडेन, एंडोसल्फान, मेलाथियान, क्लोर पायरीफ़ोस नामक कीटनाशकों से कैंसर बहुत व्यापक पैमाने पर होता देखा गया है| और यह बहुत चिंता की बात है कि पानी की बोतलों में कैंसर की बीमारी पैदा करने वाले रसायन मिले| ये वैज्ञानिक बताते हैं कि मुम्बई से ज्यादा दिल्ली के नमूनों में कीटनाशक रसायनों की मात्रा पाई गई| लेकिन यह हाल तो पूरे देश का है, कहीं कम, कहीं ज्यादा लेकिन कीटनाशक है तो सभी में|मिनरल वॉटर और शुद्ध पेय जल के नाम पर बेची जाने वाली बोतलों में कीटनाशक पाए गए हैं| और सब जानते हैं कि कीटनाशक मनुष्य एवं सभी जीव-जंतुओं के लिए ज़हर हैं| चौंकाने वाली बात ये है कि कीटनाशक सभी कंपनियों की बोतलों में मिले है| और हर बोतल में कीटनाशकों की मात्रा सामान्य से कई गुना तक ज्यादा मिली है|
चिंता की बात ये है कि ग़रीब आदमी भी अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा ख़र्च करके ये पानी ख़रीदता है और उसे मिलता क्या है – कैंसर का ख़तरा| यहाँ सवाल ये भी उठता है कि सरकार इस बारे में क्या कर रही है? जब तक आम आदमी की सेहत के बारे में बनाए गए नियम क़ानून और मानक लागू नहीं किए जाते, तब तक कुछ नहीं हो सकता| मुद्दा ये भी है कि पानी की बोतलें बनाने वाली कंपनियों के स्थान पर आम आदमी की सेहत का ज़्यादा ध्यान रखा जाना चाहिए|
कुछ समय पूर्व भारतीय रेल्वे ने भी रेल्वे स्टेशनों पर पेयजल की उपलब्धता एवं गुणवत्ता पर काम करने की बजाए ‘रेल नीर’ ब्रांड का बोतलबंद पानी का व्यापार आरंभ कर दिया| पिछले वर्ष सरकार ने अंग्रेजों द्वारा वर्ष 1867 में बनाया गया सराय एक्ट भी समाप्त कर दिया। इसके तहत यह बाध्यता थी कि किसी भी पड़ाव, सराय, होटल या अन्य ऐसा स्थान जहां ग्राहक आकर रूकते हों उसके मालिक को ग्राहक के लिए आते ही पानी का गिलास पेस करना होगा और उसका कोई पैसा ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। ऐसा न करने वाले पर जुर्माने का प्रावधान था।
इस कानून के जाने को शक की निगाह से देखा जाए तो लगता है कि कहीं जानबूझ कर तो नहीं सराय कानून को मिटा दिया गया है। संदेह करने का कारण कतई स्पष्ट है कि वर्तमान में जिस प्रकार से पानी का बाजारीकरण हुआ उसमें कहीं न कहीं सराय कानून कानूनन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के बिजनेस पर असर डाल रहा था। ये कम्पनियां उस प्रत्येक दरवाजे को बंद कर देना चाहती हैं जो कि इनकी कमाई के आड़े आता हो।
सराय कानून का चले जाना इसी षड़यंत्र का नतीजा है। क्योंकि प्याऊ लगाने वाली संस्कृति के देश भारत को सराय एक्ट से नई उर्जा मिली थी कि हमारी एक संस्कृति को अंग्रेजों द्वारा कानूनन भी बाध्य कर दिया गया है। लेकिन आजाद देश के हमारे कर्णधारों उसी संस्कृति को मिटाने के लिए उतारू हैं। आखिर ऐसा क्या नुकसान हो जाता अगर सराय कानून बना रहता? आखिर कौन सा पहाड़ टूट पड़ता अगर इस कानून को निरस्त नहीं किया जाता, लेकिन भविष्य के बड़े बिजनेस पर निगाह गड़ाए बैठी कम्पनियों की नजर में यह कानून खटक रहा था।
हमने इस कानून से अपनी संस्कृति को जोड़ लिया था लेकिन कानून की सख्ताई समाप्त होने पर हम संस्कृति से भी हाथ न धो बैठें।

शुद्ध शहद की पहचान प्रयोग करने की सही विधी

शहद शुद्धता की पहचान

ज्यादा तर लोग सोचते हे की अगर शहद जम जाए तो वह नकली हे पर नही , जमा हुया शहद असली होता हे , लोग सोचते हे की वह चीनी से बनाया गया हे लेकिन चीनी की चाशनी बनाने के बाद उसके कभी crystal नहीं बनते , जेसे  नमक को पानी घोलने के बाद अगर गरम किया जाए तो बर्तन मे सिर्फ नमक के CRYSTAL ही रह जाते हे जो के चीनी मे नहीं होता
1. काँच के एक साफ ग्लास में पानी भरकर उसमें शहद की एक बूँद टपकाएँ। अगर शहद नीचे तली में बैठ जाए तो यह शुद्ध है और यदि तली में पहुँचने के पहले ही घुल जाए तो शहद अशुद्ध है।
2. शुद्ध शहद में मक्खी गिरकर फँसती नहीं बल्कि फड़फड़ाकर उड़ जाती है।
3. शुद्ध शहद आँखों में लगाने पर थोड़ी जलन होगीपरंतु चिपचिपाहट नहीं होगी।
4. शुद्ध शहद कुत्ता सूँघकर छोड़ देगाजबकि अशुद्ध को चाटने लगता है।
5. शुद्ध शहद का दाग कपड़ों पर नहीं लगता।
6. शुद्ध शहद दिखने में पारदर्शी होता है।
7. शीशे की प्लेट पर शहद टपकाने पर यदि उसकी आकृति साँप की कुंडली जैसी बन जाए तो शहद शुद्ध है।

शहद के लाभकारी प्रयोग

शहद का नियमित और उचित मात्रा में उपयोग करने से शरीर स्वस्थसुंदर,बलवानस्फूर्तिवान बनता है और दीर्घजीवन प्रदान करता है। शहद को घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं। शहद का पीएच मान से 4.8 के बीच होने से जीवाणुरोधी गुण स्वतः ही पाया जाता है। प्रातःकाल शौच से पूर्व शहद-नींबू पानी का सेवन करने से कब्ज दूर होता हैरक्त शुद्ध होता है और मोटापा कम होता है।
गर्भावस्था के दौरान स्त्रियों द्वारा शहद का सेवन करने से पैदा होने वाली संतान स्वस्थ एवं मानसिक दृष्टि से अन्य शिशुओं से श्रेष्ठ होती है। त्वचा पर निखार लाने के लिए गुलाब जलनींबू और शहद मिलाकर लगाना चाहिए। गाजर के रस में शहद मिलाकर लेने से नेत्र-ज्योति में सुधार होता है। उच्च रक्तचाप में लहसुन और शहद लेने से रक्तचाप सामान्य होता है।
त्वचा के जल जानेकट जाने या छिल जाने पर भी शहद लगाने से लाभ मिलता है।
नोट : गर्म करके अथवा गुड़घीशकरमिश्रीतेलमांस-मछली आदि के साथ शहद का सेवन नहीं करना चाहिए। जमा हुया शहद असली होता हे , उसको गरम पानी मे भिगो कर रखने से वह तरल हो जाएगा , 
हमारे यहां शुद्ध शहद मिलता है यदि आप शुद्ध शहद लेना चाहते हैं तो आप हमारे आश्रम आकर खुद जांच परख करले सकते हैं या मंगवा सकते हैंआप वेध जी को दिल्ली मे मिल सकते हें.

टूथपेस्ट के चमत्कारिक उपयोग जो आपने कभी सोचे भी नहीं होंगे





रोजाना सुबह जब हम उठते हैं तो अपनी दिनचर्या से जुड़े कुछ सामान्य कार्य होते हैं जो सभी अनिवार्य रूप से करते हैं। Brush करना भी हमारी दिनचर्या का ऐसा ही अभिन्न हिस्सा हैं। दांतों को साफ और मोतियों सा चमकदार दिखाने के लिए लोग तरह-तरह के टूथपेस्ट का उपयोग करते हैं, लेकिन क्या कभी आपने
सोचा है कि टूथपेस्ट का उपयोग दांत साफ करने के अलावा अन्य कामों में भी किया जा सकता है। अगर नहीं, तो आज हम आपको बतानेजा रहे हैं टूथपेस्ट के कुछ ऐसे Use जो आपने कभी सोचे भी नहीं होंगे…!
पिंपल की समस्या में टूथ पेस्ट बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। अगर आपको किसी पार्टी में जाना हो और चेहरे पर पिंपल निकल आए तो रात को सोने से पहले उस पर टूथपेस्ट लगा लें। रातभर में टूथपेस्ट पिंपल का तेल सोख लेगा और सुबह तक पिंपल बैठ जाएगा। इस नुस्खे को वो लोग न अजमाएं जिन्हें टूथपेस्ट से एलर्जी है।
माना जाता है कि बच्चों की दूध की Bottle अगर ठीक से साफ न होतो वह कई बीमारियों का कारण बन सकती है। इसीलिए अगर बच्चों की दूध की बॉटल को अच्छे से साफ करके Smell Free बनाने के लिए बॉटल साफ करने के ब्रश पर थोड़ा सा टूथपेस्ट लगाएं और बॉटल साफ करें।
टूथपेस्ट का Use करके घर पर ही मैनिक्योर किया जा सकता है। थोड़ी मात्रा में टूथपेस्ट लेकर उसे पानी में घोल लें। अपनेहाथों को उस पानी में डूबो लें कुछ देर तक हाथों को उसमें डूबा रहने दें। फिर हाथों को हल्के-हल्के से मसाज करें। Tooth Brush से नाखून के आसपास की सफाई करें। घर पर ही मैनिक्योर करने का ये सबसे आसान तरीका है।
कपड़े पर टमाटर सॉस या स्याही का दाग लग जाए तो टूथपेस्ट लेकर उसे कपड़े पर मलें। थोड़ी देर रहने दें फिर कपड़े को धीरे-धीरे मलें दाग दूर हो जाएगा। घर की दीवार बच्चे कलर से खराब कर दे तो टूथपेस्ट लगाकर रगड़कर साफ कर दें रंग साफ हो जाएगा।
अगर गहनों की चमक फीकी पड़ गई हो और उन्हें फिर से चमकाना हो तो गहनों पर टूथपेस्ट लगाकर Tooth Brush से साफ करें तो गहने नए से चमकने लगेंगे।
बाथरूम के धुंध से ढ़के कांच के कारण चेहरा साफ दिखाई जो नहीं दे रहा था। अगली बार ऐसा न हो इसके लिए कांच पर नॉन जेल टूथपेस्ट लगाकर नहाने से पहले वाइप करें। आप नहाकर आ जाएंगेतब भी कांच धुंधला नहीं पड़ेगा।
लगातार नेल पालिश लगाने से आपके नाखूनों की चमक फीकी पड़ गई हो तो नाखूनों से नेल पॉलिश को हटाएं और कुछ देर तक हल्के हाथों से नाखूनों पर टूथ पेस्ट से मालिश करें। नाखून चमकने लगेंगे।